पंजाब सरकार की नीतियों पर सवाल, कर्मचारियों के हितों की अनदेखी: एस. आर. लधर
Punjab government's policies questioned
दिनांक: 18 मार्च 2026 पंजाब सरकार कर्मचारी विरोधी — एस. आर. लधर
भारतीय जनता पार्टी के नेता एवं पूर्व आईएएस अधिकारी श्री एस. आर. लधर ने पंजाब सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार ने कर्मचारियों से किए गए वादों को पूरा करने के बजाय उन्हें लगातार निराश और मजबूर किया है।
पुरानी पेंशन योजना (OPS) पर वादा खिलाफी
श्री लधर ने कहा कि सरकार ने सत्ता में आने से पहले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का वादा किया था, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई ठोस और स्पष्ट कदम नहीं उठाया गया। कर्मचारियों को केवल आश्वासन देकर गुमराह किया जा रहा है, जिससे उनमें असुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेंशन का भुगतान राज्य सरकार की जिम्मेदारी होती है, इसमें केंद्र सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार ने पंजाब में न्यू पेंशन स्कीम लागू की थी, जिसे बाद में अकाली दल और वर्तमान सरकार ने भी जारी रखा।
महंगाई भत्ता (DA) में भेदभाव और देरी
उन्होंने कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन कर्मचारियों को समय पर महंगाई भत्ता नहीं दिया जा रहा। पंजाब वर्तमान में लगभग 42% डीए दे रहा है, जो केंद्र सरकार के मुकाबले लगभग 18% कम है। वहीं आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को केंद्र के अनुरूप भत्ते तुरंत लागू कर दिए जाते हैं। इस प्रकार का भेदभाव न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि अमानवीय भी है।
प्रोबेशन पीरियड में वेतन कटौती — अन्यायपूर्ण व्यवस्था
श्री लधर ने कहा कि कर्मचारियों को लंबे समय तक प्रोबेशन पर रखकर उन्हें कम और लंपसम वेतन देना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। समान काम के लिए अलग-अलग वेतन देना नैतिकता के खिलाफ है और इससे कर्मचारियों का मनोबल गिरता है। उन्होंने कहा कि एक समय था जब पड़ोसी राज्य पंजाब पैटर्न अपनाने की मांग करते थे, लेकिन आज की सरकारों ने पंजाब को पिछड़ेपन की स्थिति में ला खड़ा किया है।
कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों का शोषण
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों का खुला शोषण कर रही है। वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को न तो नियमित किया जा रहा है और न ही उन्हें स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हरियाणा सरकार ने ऐसे कर्मचारियों के लिए एक सरकारी निगम बनाकर वेतन और सुविधाओं का प्रबंध किया है। क्या पंजाब सरकार उससे सीख भी नहीं ले सकती?
कर्मचारी सड़कों पर — सरकार मौन
श्री लधर ने कहा कि अपने अधिकारों के लिए कर्मचारी बार-बार सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। धरने, प्रदर्शन और हड़तालें इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार कर्मचारियों की आवाज सुनने को तैयार नहीं है।
हक का भुगतान रोका जा रहा है
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को उनके वैध देय—जैसे एरियर, भत्ते और अन्य वित्तीय लाभ—समय पर नहीं दिए जा रहे। हर स्तर पर देरी और टालमटोल की नीति अपनाई जा रही है, जिससे कर्मचारियों में रोष बढ़ रहा है।
भ्रष्टाचार की ओर धकेल रही सरकार
श्री लधर ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब कर्मचारियों को उनका उचित वेतन और सुविधाएं नहीं मिलतीं, तो उन्हें मजबूरी में गलत रास्तों की ओर धकेला जाता है। यह स्थिति प्रशासनिक तंत्र को कमजोर करती है और सरकार की नीतिगत विफलता को उजागर करती है।
अंत में श्री लधर ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही अपनी कर्मचारी विरोधी नीतियों को नहीं बदला और वादों को पूरा नहीं किया, तो कर्मचारी वर्ग का आक्रोश और तेज होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। उन्होंने सरकार से तुरंत संवाद स्थापित कर कर्मचारियों की सभी जायज मांगों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की मांग की।
एस. आर. लधर
(S. R. Ladhar)
9417500610